देश में ईंधन संकट के बीच दिल्ली सरकार ने अपने लाखों कर्मचारियों को एक बड़ी राहत दी है। नए फैसले के मुताबिक, दफ्तर आने-जाने के लिए मेट्रो, बसों या अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग करने वाले दिल्ली सरकार के कर्मचारियों को अब 10 फीसदी अतिरिक्त भत्ता दिया जाएगा। वित्त विभाग ने इस योजना का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। सचिवालय द्वारा इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक कार्यालय आदेश जारी कर दिया जाएगा, जिसके तुरंत बाद यह योजना सभी सरकारी विभागों, स्वायत्त निकायों और स्थानीय निकायों में लागू हो जाएगी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना का फायदा पाने के लिए कर्मचारियों को एक आसान शर्त पूरी करनी होगी। उन्हें अपने ट्रांसपोर्ट अलाउंस का कुछ हिस्सा कॉमन मोबिलिटी कार्ड में खर्च करना होगा। तभी वे सरकार की ओर से मिलने वाले 10 फीसदी अतिरिक्त भत्ते के पात्र बनेंगे। आदेश के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी अपने मासिक ट्रांसपोर्ट अलाउंस (महंगाई भत्ता छोड़कर) का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा दिल्ली सरकार के कॉमन मोबिलिटी कार्ड को खरीदने या उसे रिचार्ज करने में इस्तेमाल करता है, तो ही वह इस 10 प्रतिशत के अतिरिक्त इंसेंटिव का हकदार होगा। इस अतिरिक्त भत्ते की गणना कर्मचारी के बेसिक ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर की जाएगी और हर महीने इस इंसेंटिव का भुगतान सीधे कर्मचारी के वेतन के साथ ही बैंक खाते में कर दिया जाएगा।
पूरी तरह वैकल्पिक होगी योजना
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अनिवार्य नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से वैकल्पिक होगी। जो कर्मचारी अपनी गाड़ियों या निजी वाहनों से दफ्तर आना चाहते हैं, वे आ सकते हैं। लेकिन जो कर्मचारी सार्वजनिक परिवहन को चुनेंगे, उन्हें उनकी लिखित सहमति के बाद दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की ओर से विशेष कॉमन मोबिलिटी कार्ड जारी किया जाएगा। इस एक ही कार्ड की मदद से कर्मचारी दिल्ली मेट्रो और डीटीसी की इलेक्ट्रिक व सीएनजी बसों में आसानी से सफर कर सकेंगे।
शुरुआती 6 महीने के लिए लागू होगी स्कीम
वित्त विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ईंधन संकट और सड़कों पर गाड़ियों की भीड़ को कंट्रोल करने के उद्देश्य से लाई जा रही यह इंसेंटिव स्कीम फिलहाल शुरुआती तौर पर 6 महीने की अवधि के लिए लागू की जाएगी। इस पायलट पीरियड के दौरान योजना के वित्तीय बोझ और सार्वजनिक परिवहन पर पड़ने वाले असर की गहन समीक्षा की जाएगी। यदि यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहता है और कर्मचारी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, तो समीक्षा के बाद इस योजना की समय-सीमा को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।